बुधवार, 29 जुलाई 2020

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day)

 राष्ट्रीय पशु अंतरराष्ट्रीय दिवस

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस  (International Tiger Day)

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस विश्व भर में 29 जुलाई 2019 को मनाया जा रहा है. यह दिवस जागरूकता दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है. विभिन्न देशों में अवैध शिकार एवं वनों के नष्ट होने के वजह से बाघों की संख्या में काफी गिरावट आई है.

विश्व भर में इस दिन बाघों के संरक्षण से सम्बंधित जानकारियों को साझा किया जाता है और इस दिशा में जागरुकता अभियान चलाया जाता है. विश्वभर में बाघों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक दिन बाघों के नाम समर्पित किया जाता है.

बाघों की गणना

बाघों की गणना को लेकर इससे पहले साल 2006, साल 2010 और साल 2014 में रिपोर्ट जारी हो चुकी है. देश में बाघों के संरक्षण का यह काम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) की देखरेख में ही चल रहा है.

उद्देश्य:

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य जंगली बाघों के निवास के संरक्षण और विस्तार को बढ़ावा देने के साथ बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. इनकी तेजी से कम हो रही संख्या को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी हैनहीं तो ये खत्म हो जाएंगे.

पिछले 100 सालों में बाघों की आबादी का लगभग 97 प्रतिशत खत्म हो चुकी है. 'वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंडऔर 'ग्लोबल टाइगर फोरमके साल 2016 के आंकड़ों के अनुसारविश्वभर में करीब 6000 बाघ ही बचे हैंजिनमें से 3891 बाघ भारत में हैं. बाघों की संख्या साल 1915 में एक लाख थी.

बाघों की कुछ प्रजातियां पहले ही खत्म (विलुप्त) हो चुकी हैं. भारत उन देशों में शामिल है जिसमे बाघों की जनसंख्या सबसे अधिक है. भारतनेपालरूस और भूटान में पिछले कुछ समय से बाघों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गयी है.

बाघों की आबादी में कमी की मुख्य कारण:

मनुष्यों द्वारा शहरों और कृषि का विस्तार इसका मुख्य कारण है. इस विस्तार के वजह से बाघों का 93 प्रतिशत प्राकृतिक आवास खत्म हो चुका है. बाघों की अवैध शिकार भी एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से बाघ अब अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के विलुप्तप्राय श्रेणी में आ चुके हैं. बाघों का अवैध शिकार उनके चमड़ेहड्डियों एवं शरीर के अन्य भागों के लिए किया जाता है. इनका इस्तेमाल परंपरागत दवाइयों को बनाने में किया जाता है. कई बार बाघों की हत्या शान में भी की जाती है. इसके अतिरिक्तजलवायु परिवर्तन भी बहुत बड़ी वजह है जिससे जंगली बाघों की आबादी कम होते जा रही है. जलवायु परिवर्तन के कारण से समुद्र का स्तर बढ़ रहा है जिससे जंगलों के खत्म होने का खतरा पैदा हो गया.

राष्ट्रीय पशु:

भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ को कहा जाता है. बाघ देश की शक्तिशानसतर्कताबुद्धि तथा धीरज का प्रतीक है. बाघ भारतीय उपमहाद्वीप का प्रतीक है. यह उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर पूरे देश में पाया जाता है. विश्वभर में बाघों की कई तरह की प्रजातियां मिलती हैं. इनमें 6 प्रजातियां मुख्य हैं. इनमें साइबेरियन बाघबंगाल बाघइंडोचाइनीज बाघमलायन बाघसुमात्रा बाघ तथा साउथ चाइना बाघ शामिल हैं. भारत द्वारा 18 नवम्बर 1972 को बाघ को राष्ट्रीय पशु के रूप मेंं चुना गया।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के बारे में:

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाने का फैसला साल 2010 में सेंट पिट्सबर्ग बाघ समिट में लिया गया था क्योंकि तब जंगली बाघ विलुप्त होने के कगार पर थे. इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि साल 2022 तक वे बाघों की आबादी दुगुनी कर देंगे.

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