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बुधवार, 20 जनवरी 2021

अरुणाचल प्रदेश Arunachal Pradesh

 अरुणाचल प्रदेश

Arunachal Pradesh

ब्यौरे

विवरण

क्षेत्रफल

83,743 वर्ग किलोमीटर

राजधानी

ईटानगर

मुख्‍य भाषाएं

मोनपा, मिजी, अका, शेरदुकपेन, निशी, अपतानी,तगिन, अदी, दिगारू-मिशमी, इदु-मिशमी, मिजु-मिशमी, खमटी, नोकटे, तंगसा और वांचू

 

अरुणाचल प्रदेश भारत का एक उत्तर पूर्वी राज्य है। अरुणाचल का अर्थ हिन्दी मे "उगते सूर्य का पर्वत" है (अरूण + अचल ; 'अचल' का अर्थ 'न चलने वाला' = पर्वत होता है।)।

प्रदेश की सीमाएँ दक्षिण में असम दक्षिणपूर्व मे नागालैंड पूर्व मे बर्मा/म्यांमार पश्चिम मे भूटान और उत्तर मे तिब्बत से मिलती हैं। ईटानगर राज्य की राजधानी है। प्रदेश की बोलचाल की मुख्य भाषा हिन्दी है।

राज्य का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण तिब्बत के क्षेत्र के हिस्से के रूप में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और चीन गणराज्य (ताइवान) दोनों द्वारा दावा किया जाता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, अरुणाचल प्रदेश के आधे से भी ज़्यादा हिस्से पर चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अस्थायी रूप से कब्जा कर लिया था। फिर चीन ने एकतरफ़ा युद्ध विराम घोषित कर दिया और उसकी सेना मैकमहोन रेखा के पीछे लौट गई।

भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर के राज्यों में यह सबसे बड़ा राज्य है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तरह इस प्रदेश के लोग भी तिब्बती-बर्मी मूल के हैं। वर्तमान समय में भारत के अन्य भागों से बहुत से लोग आकर यहाँ आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ कर रहे ।

इतिहास और भूगोल

अरूणाचल प्रदेश को 20 फरवरी, 1987 को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिला। 1972 तक यह पूर्वोत्‍तर सीमांत एजेंसी के नाम से जाना जाता था। इसे 20 जनवरी 1972 से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।

15 अगस्‍त, 1975 को चयनित विधानसभा का गठन किया गया तथा पहली मंत्री परिषद ने कार्यभार ग्रहण किया। प्रथम आम चुनाव फरवरी, 1978 में करवाए गए।

राज्‍य में 16 जिले हैं। राज्‍य की राजधानी ईटानगर पापुम पारा जिले में हैं। ईटानगर नाम ईटा किले पर पड़ा है जिसका अर्थ है ईंटों का किला, जिसे 14 सदी पूर्व बनाया गया था।

कल्कि पुराण तथा महाभारत में अरूणाचल प्रदेश का उल्‍लेख मिलता है। यह पुराणों में वर्णित प्रभु पर्वत नामक स्‍थान है।

परशुराम ने यहां अपने पापों का प्रायश्चित किया था, ऋषि व्‍यास ने यहां आराधना की थी, राजा भीष्‍मक ने यहां अपना राज्‍य बसाया तथा भगवान कृष्‍ण ने रूक्मिणि से विवाह किया था।

अरूणाचल प्रदेश के विभिन्‍न भागों में फैले पुरातात्विक अवशेषों से पता चलता है कि इसकी एक समृद्ध सांस्‍कृतिक परंपरा रही है।

त्‍योहार

अरुणाचल प्रदेश के लोक नृत्‍य

राज्‍य के कुछ महत्‍वपूर्ण त्‍यौहारों में अदीस लोगों द्वारा मनाए जाने वाले मोपिन और सोलुंग; मोनपा लोगों का त्योहार लोस्‍सार; अपतानी लोगों का द्री, तगिनों का सी-दोन्‍याई; इदु-मिशमी समुदाय का रेह; निशिंग लोगों का न्‍योकुम आदि शामिल हैं। अधिकांश त्‍यौहारों के अवसर पर पशुओं की बलि चढ़ाने की प्रथा है।

कृषि और बागवानी

अरूणाचल प्रदेश के लोगों के जीवनयापन का मुख्‍य आधार कृषि है। यहां की अर्थव्‍यवस्‍था मुख्‍यत: झूम खेती पर आधारित है। अब नकदी फसलों, जैसे- आलू और बागवानी की फसलों, जैसे- सेब, संतरे और अनन्‍नास आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

खनिज और उद्योग

राज्‍य की विशाल खनिज संपदा का पता लगाने तथा उसे संरक्षण के लिए 1991 में अरूणाचल प्रदेश खनिज विकास और व्‍यापार निगम लिमिटेड (ए.पी.एम.डी.टी.सी.एल.) की स्‍थापना की गई। निगम ने नामचिक-नामफुक कोयला क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया है।

परिवहन

सड़कें: अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग के 330 किलोमीटर है।

पर्यटन स्‍थल

राज्‍य के प्रमुख पर्यटन स्‍थल हैं- तवांग, दिरांग, बोमडिला, टीपी, ईटानगर, मालिनीथान, लीकाबाली, पासीघाट, अलोंग, तेज़ू, मियाओ, रोइंग, दापोरिजो, नामदफा, भीष्‍मकनगर, परशुराम कुंड और खोंसा।

पंचायती राज

राज्य सरकार के समर्थन में अरुणाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग। सफलतापूर्वक गांव और जमीनी स्तर में तेजी से विकास के लिए मई 2008 के महीने में राज्य में पंचायती राज चुनावों का आयोजन किया और पूरा कर लिया है।

मंगलवार, 1 दिसंबर 2020

नागालैण्‍ड Nagaland

 


नागालैण्‍ड

Nagaland

ब्यौरे

विवरण

क्षेत्रफल

16,579 वर्ग किलोमीटर

राजधानी

कोहिमा

मुख्य भाषा

अंग्रेजी, हिंदी और 16 आदिवासी बोलियों

इतिहास और भूगोल

नागालैंड 1 दिसंबर, 1963 को भारतीय संघ का 16वां राज्‍य बना। यह राज्‍य पूर्व में म्‍यांमार, उत्‍तर में अरूणाचल प्रदेश, पश्चिम में असम और दक्षिण में मणिपुर से घिरा हुआ है। यह पूर्व में 98 सेल्सियस तथा 96 सेल्सियस देशांतर तथा भूमध्‍य रेखा के उत्‍तर में 26.6 से‍ल्सियस तथा 27.4 सेल्सियस अक्षांश के बीच बसा हुआ है।

नागालैंड राज्‍य का क्षेत्रफल 16,579 वर्ग कि.मी. तथा 2001 का जनगणना के अनुसार इसकी आबादी 19,88,636 है। असम घाटी की सीमा से लगे क्षेत्र के अलावा इस राज्‍य का क्षेत्र अधिकांशतः पहाड़ी है। इसकी सबसे ऊंची पहाड़ी सरमती है जिसकी ऊंचाई 3,840 मीटर है और यह पर्वत श्रृंखला नागालैंड और म्‍यांमार के बीच एक प्राकृतिक सीमा रेखा खींच देती है।

नागा लोग भारतीय-मंगोल वर्ग लोगों में से है, जो भारत की उत्‍तर-पूर्वी पहाडियों से सटे क्षेत्रों और पश्चिमी म्‍यांमार के ऊपरी भाग में रहते हैं। नागालैंड की प्रमुख जनजातियां है: अंगामी, आओ, चाखेसांग, चांग, खिआमनीउंगन, कुकी, कोन्‍याक, लोथा, फौम, पोचुरी, रेंग्‍मा, संगताम, सुमी, यिमसचुंगरू और ज़ेलिआंग। नागा भाषा एक जनजाति से दूसरी जनजाति और कभी-कभी तो एक गांव से दूसरे गांव में भी अलग हो जाती है। तथापि इन्‍हें तिब्‍बत बर्मा भाषा परिवार में वर्गीकृत किया गया है।

बारहवीं-तेरहवीं शताब्‍दी में इन लोगों के असम के अहोम लोगों से धीरे-धीरे संपर्क हुआ, लेकिन इससे इन लोगों के रहन-सहन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन उन्‍नीसवीं शताब्‍दी में अंग्रेजों के आगमन पर यह क्षेत्र ब्रिटिश प्रशासन के अधीन आ गया। स्‍वंतत्रता के पश्‍चात 1957 में यह क्षेत्र केंद्रशासित प्रदेश बन गया और असम के राज्‍यपाल द्वारा इसका प्रशासन देखा जाने लगा। यह नगा हिल्‍स तुएनसांग क्षेत्र कहलाया। यह जनता की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतरा और असंतोष पनपने लगा। अत: 1961 में इसका नाम बदलकर 'नागालैंड' रखा गया और इसे भारतीय संघ के राज्‍य का दर्जा दिया गया, जिस‍का विधिवत उद्घाटन 1 दिसंबर, 1963 को हुआ।

संस्कृति

नागालैंड मे 16 जनजातियाँ पाई जाती है, अंगामी, आओ, चख़ेसंग, चांग, दिमासा कचारी, खियमनिंगान, कोनयाक, लोथा, फोम, पोचुरी, रेंगमा, संगतम, सूमी, इंचुंगेर, कुकी और ज़ेलियांग।

कृषि

नागालैंड मूलत: कृषि की भूमि है। लगभग 70 प्रतिशत जनता कृषि पर निर्भर है। राज्‍य में कृषि क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण योगदान है। चावल यहां का मुख्‍य भोजन है। कुल क्षेत्र के 70 प्रतिशत में धान की खेती होती है और राज्‍य के कुल खाद्यान्‍न उत्‍पादन का 75 प्रतिशत चावल है।

यहां मुख्‍यत: 'स्‍लेश' और 'बर्न' खेती प्रचलित है, जिसे स्‍थानिय तौर पर झूम के नाम से जाना जाता है। करीब 1,01,400 हेक्‍टेयर क्षेत्र में झूम खेती और हेक्‍टेयर क्षेत्र में सीढीदार खेती की गई। इस वर्ष के दौरान खाद्य उत्‍पादन 3,86,300 मीट्रिक टन था।

16,57,587 हेक्‍टेयर के कुल भूमिक्षेत्र में से करीब 8,35,436 हेक्‍टेयर क्षेत्र में वन है। कोहिमा जिले में इंतंकी तथा पुलीबादजे, तुएनसांग में फाकिम और दीमापुर में रंगापहाड नामक वन्‍यजीव अभयारण्‍य तथा राष्‍ट्रीय उद्यान है।

बिजली

1981 की जनगणनानुसार नागालैंड के सभी गांवों में बिजली दी गई है। नागालैंड में अब तक शतप्रतिशत गांवों को बिजली दी गई है, जिसमें दूरस्‍थ गांव भी शामिल हैं।

सिंचाई

राज्‍य में कोई बड़ी या मंझोली सिंचाई परियोजना नहीं है। छोटी सिंचाई परियोजनाओं से मुख्‍यत: पहाडी झरनों की धारा मोडी जाती है, जो घाटी में धान की खेती की सिंचाई में काम आती है। कुल सिंचित क्षेत्र 93,231.43 हेक्‍टेयर है।

परिवहन

सडकें: राज्‍य में सडकों की कुल लंबाई 9,860 किलोमीटर है, जिसमें राष्‍ट्रीय राजमार्ग, प्रांतीय राजमार्ग, जिला तथा ग्रामीण सडकें शामिल हैं। कुल 900 से अधिक गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है।

रेलवे/उड्डयन: नागालैंड में दीमापुर एकमात्र ऐसा स्‍थान है, जहां रेल और विमान सेवाएं उपलब्‍ध हैं। कोलकाता से दीमापुर को जोड़ने के लिए सप्‍ताह में तीन दिन इंडियन एयरलाइंस की उड़ान सेवाएं उपलब्‍ध हैं।

त्‍योहार

संगीत और नृत्‍य नगा जनजीवन के मूलभूत अंग हैं। वीरता, सुंदरता, प्रेम और उदारता का गुणगान करने वाले लोकगीत और लोकगाथाएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली जा रही हैं। इसी तरह नृत्‍य हर उत्‍सव का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। हर त्‍योहार पर दावत, नाच-गाना और उल्‍लास होता है। राज्‍य के कुछ महत्‍वपूर्ण त्‍योहार हैं सेकरेन्‍यी, मोआत्‍सु, तोक्‍कू एमोंगा और तुलनी।

उद्योग

राज्‍य में औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया अभी अपनी शैशवावस्‍था में है, किंतु और अधिक उद्योग लगाने की आवश्‍यकता को अच्‍छी तरह पहचाना गया है। दीमापुर में एक लाख ईंटे प्रतिदिन उत्‍पादित करने की क्षमता वाली नागालैंड मैकेनाइज्‍ड ब्रिक्‍स कंपनी लि. चालू कर दी गई है। हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प महत्‍वपूर्ण कुटीर उद्योग है, जो अधिकतर सहकारी समितियों द्वारा चलाए जा रहे है। दीमापुर स्थित नगालैंड हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प विकास निगम लि. सरकार के स्‍वामित्‍व वाला निगम है, जो राज्‍य में हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प के उत्‍पादों को बढ़ावा देने और उनके विपणन का काम करता है। दीमापुर के नि‍कट गणेश में एक औद्योगिक विकास केंद्र बनकर तैयार हो गया है।

नागालैंड औद्योगिक विकास निगम उद्यमियों को मार्गदर्शन और वित्‍तीय सहायता देने वाली सबसे बड़ी प्रोत्‍साहक संस्‍था है। दीमापुर के फल और सब्‍जी प्रसंस्‍करण और कोल्‍ड स्‍टोरेज संयंत्र की स्‍थापित क्षमता क्रमश: 5 मीट्रिक टन फल और सब्‍जी के प्रसंस्‍करण और 3000 मीट्रिक टन प्रतिदिन के कोल्‍ड स्‍टोरेज की है।

पर्यटन स्‍थल

प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) में ढील देने वाले राज्‍य में अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यटकों का आना-जाना शुरू हो गया है, यहां प्रतिवर्ष बडी संख्‍या में देशी विदेशी पर्यटक आते हैं।

पर्यटन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष दिसंबर माह के प्रथम सप्‍ताह में 'हॉर्नबिल' उत्‍सव आयोजित किया जाता है, जिसमें नागालैंड की सभी जनजातियां एक जगह आकर उत्‍सव मनाती हैं और अपनी पांरपरिक वस्‍तुओं, खाद्य पदार्थों और शिल्‍पगत चीजों का प्रदर्शन करती तथा बेचती हैं। तीन पारंपरिक उत्‍सवों-कोहिमा जिले के तोउफेमा में सेकरेन्‍यी (26-27 फरवरी); लोंगलेंग उपमंडल के पोगो में मोन्‍यू (1-3 अप्रैल) तथा मोकोकचुंग जिले के चुचुयिमलांग में मोआत्‍सु (1-3 मई) की उत्‍सव गंतव्‍यों के रूप में पहचान की गई है।

रविवार, 22 नवंबर 2020

तमिलनाडु (Tamil Nadu)

 


तमिलनाडु

(Tamil Nadu)


क्षेत्रफल

1,30,058 वर्ग किलोमीटर

राजधानी

चेन्‍नई

मुख्‍य भाषा

तमिल

राज्य पशु

नीलगिरि तहर

राज्य पक्षी

पन्ना कबूतर

राज्य नृत्य

भारतनाट्टयम

राज्य पुष्प

करी हरी

राज्य गीत

नीरारम

राज्य खेल

सादुगुडु

राज्य वृक्ष

ताड़

    
इतिहास और भूगोल

तमिलनाडु का इतिहास अत्‍यंत प्राचीन है। यद्यपि प्रारंभिक काल के संगम ग्रंथों में इस क्षेत्र के इतिहास का अस्‍पष्‍ट उल्‍लेख मिला है, किंतु तमिलनाडु का लिखित इतिहास पल्‍लव राजाओं के समय से ही उपलब्ध है।

दक्षिण भारत पर कई शताब्‍दियों तक चोल, चेर और पांड्य राजाओं का शासन रहा। चौथी शताब्‍दी के पूर्वार्द्ध में पल्‍लवों का वर्चस्‍व कायम हुआ। उन्‍होंने ही द्रविड़ शैली की प्रसिद्ध मंदिर वास्‍तुकला का सूत्रपात किया। अंतिम पल्‍लव राजा अपराजित थे, जिनके राज्‍य में लगभग दसवीं शताब्दी में चोल शासकों ने विजयालय और आदित्‍य के मार्गदर्शन में अपना महत्‍व बढ़ाया। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी के अंत में तमिलनाडु पर चालुक्‍य, चोल, पांड्य जैसे अनेक राजवंशों का शासन रहा। इसके बाद के 200 वर्षों तक दक्षिण भारत पर चोल साम्राज्‍य का अधिपत्‍य रहा।

मुसलमानों ने भी धीरे-धीरे अपनी स्‍थिति मजबूत कर ली जिसे चौदहवीं शताब्‍दी के मध्‍य में बहमनी सल्‍तनत कायम हुई। लगभग उसी समय विजयनगर साम्राज्‍य ने तेजी से अपनी स्‍थिति मजबूत बना ली और समूचे दक्षिण भारत का अपना प्रभाव बढ़ा लिया। शताब्‍दी के अंत तक विजयनगर साम्राज्‍य दक्षिण की सर्वोच्‍च शक्‍ति बन चुका था, किंतु 1564 में तालीकोटा की लड़ाई में दक्षिण के सुल्‍तानों की सामूहिक फौजों से वह पराजित हो गया।

तालीकोटा के युद्ध के बाद कुछ समय तक स्‍थिति अस्‍पष्‍ट रही, लेकिन इस बीच यूरोप के व्‍यापारी अपने व्‍यापारिक हितों के लिए दक्षिण भारत में अपने पैर जमाने के लिए एक-दूसरे से होड़ करने लगे थे। पुर्तगाल, हॉलैंड, फ्रांस और इंग्‍लैंड के लोग एक के बाद एक जल्‍दी-जल्‍दी आए और उन्‍होंने अपने व्‍यापारिक केंद्र स्‍थापित कर लिए, जिन्‍हें उन दिनों फैक्‍ट्रीज़ कहा जाता था। ईस्‍ट इंडिया कंपनी ने 1611 में मछलीपत्तनम (जो अब आंध्र प्रदेश में है) में अपनी फैक्‍ट्री लगाई और धीरे-धीरे उन्होंने स्‍थानीय शासकों को आपस में लड़ाकर उनके क्षेत्र हथिया लिए। ब्रिटिश लोगों ने भारत में सबसे पहले तमिलनाडु में अपनी बस्‍ती बसाई। सन् 1901 में मद्रास प्रेसीडेंसी बनी जिसमें दक्षिण प्रायद्वीप के अधिकतर हिस्‍से शामिल थे। बाद में संयुक्‍त मद्रास राज्‍य का पुनर्गठन किया गया और वर्तमान तमिलनाडु राज्‍य अस्‍तित्‍व में आया।

ब्रिटिश शासनकाल में यह प्रान्त मद्रास प्रेसिडेंसी का भाग था। स्वतन्त्रता के बाद मद्रास प्रेसिडेंसी को विभिन्न भागों में बाँट दिया गया, जिसका परिणति मद्रास तथा अन्य राज्यों में हुई। राज्य का गठन 26 जनवरी 1950 को हुआ तथा इसका नाम मद्रास राज्य रखा गया, 22 नवम्बर 1968 में मद्रास प्रान्त का नाम बदलकर तमिल नाडु कर दिया गया। तमिलनाडु शब्द तमिल भाषा के तमिल तथा नाडु यानि देश या वासस्थान, से मिलकर बना है जिसका अर्थ तमिलों का घर या तमिलों का देश होता है।

तमिलनाडु के उत्तर में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक, पश्चिम में केरल, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर हैं।

कृषि

तमिलनाडु में मुख्‍य व्‍यवसाय कृषि है। राज्‍य में कुल खेती योग्‍य क्षेत्र 58.15 लाख हेक्‍टेयर था। प्रमुख खाद्यान्‍न फसलें चावल, ज्वार और दालें हैं। प्रमुख व्‍यापारिक फसलों में गन्‍ना, कपास, सूरजमुखी, नारियल, काजू, मिर्च और मूंगफली हैं। अन्‍य पौध फसलें हैं - चाय, कॉफी, इलायची और रबड़। मुख्‍य वन उत्‍पाद हैं - इमारती लकड़ी, चंदन की लकड़ी, पल्‍पवुड और जलाने योग्‍य लकड़ी। जैव उर्वरकों के उत्‍पादन और इस्‍तेमाल में तमिलनाडु का प्रमुख स्‍थान है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृषि उत्‍पादन बढ़ाने के लिए कृषि तकनीक में सुधार किया जा रहा है।

उद्योग और खनिज

सूती कपड़ा, भारी वाणिज्‍यिक वाहन, ऑटो कल-पुर्जे, रेल डिब्‍बे, विद्युत चालित पंप, चमड़ा उद्योग, सीमेंट, चीनी, कागत, ऑटोमोबाइल और माचिस।

तमिलनाडु के औद्योगिक परिदृश्‍य में सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे ज्ञान आधारित उद्योगों को विशेष महत्‍व दिया गया है। सॉफ्टवेयर टेक्‍नोलॉजी पार्क, टाईडैल की स्‍थापना थारामणि, चेन्‍नई में की गई है। चेन्‍नई में इस समय 900 आई.टी. कंपनियों में करीब 50,000 सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ कार्यरत हैं। नोकिया, मोटोरोला, फाक्‍सकॉम, फ्लैक्‍सट्रॉनिक जैसी बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार कंपनियां यहां उत्‍पादन कर रही हैं।

अंतर्राष्‍ट्रीय ऑटो कंपनी हुंडई मोटर्स, फोर्ड, हिंदुस्‍तान मोटर्स और मित्‍सुबिशी ने तमिलनाडु में उत्‍पादन इकाइयां शुरू की है। अशोक लेलैंड और टैफे ने चेन्‍नई में विस्‍तार संयंत्र लगाए हैं।

ग्रेनाइट, लिग्‍नाइट और चूना पत्‍थर राज्‍य की प्रमुख खनिज संपदा है। राज्‍य तैयार खालों और चमड़े का सामान, सूती धागे, चाय, कॉफी, मसाले, इंजीनियरिंग सामान, तंबाकू, हस्‍तशिल्‍प वस्‍तुएं और काले ग्रेनाइट पत्‍थर का प्रमुख निर्यातक है। तमिलनाडु में देश के 60 प्रतिशत चमड़ा शोधन कारखाने हैं।

सिंचाई

विश्‍व बैंक की सहायता से कार्यान्‍वित 'प्रणाली सुधार और किसान आय परियोजना' के फलस्‍वरूप महत्‍वपूर्ण सिंचाई योजनाओं तथा वर्तमान पेरियार वैगई प्रणाली, पालार थाला प्रणाली और पैरंबीकुलम-अलियार प्रणाली के अलावा छ: लाख एकड़ की अयकाट तथा वेल्‍लार, पेन्‍नायर, अरनियार अमरावती, चिथार थाला आदि छोटी सिंचाई प्रणालियां लाभान्‍वित हुई हैं। विश्‍व बैंक ने सिंचित कृषि आधुनिकीकरण तथा जलाशय प्रबंधन परियोजना के लिए 2,547 करोड़ रुपये स्‍वीकृत किए हैं। इससे राज्‍य के चुने हुए 63 उप-थालों के 617 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को लाभ पहुंचेगा। हाल ही में शुरू हुई और धीमी गति से चल रही नौ सिंचाई परियोजनाओं का काम समुचित धन और मार्गदर्शन के बाद तेजी से चल रहा है और शीघ्र पूरा हो जाएगा। तमिलनाडु के एक तिहाई क्षेत्र की सिंचाई करने वाली बड़ी सिंचाई प्रणाली - तालाब सिंचाई प्रणाली - के विकास पर विशेष ध्‍यान दिया जा रहा है और सार्वजनिक निर्माण विभाग के पालार, वैगई तथा ताम्रपर्णी थालों में कार्यरत 620 तालाबों के पुनर्वास और विकास का काम किया जा रहा है। यह परियोजना पूरी होने वाली है और किसानों की पूरी संतुष्‍टि की गई है। तमिलनाडु 'नदी थाला प्रबंधन' प्रणाली लागू करने वाला ऐसा पहला राज्‍य है जो ऐसी व्‍यक्‍तिगत संस्‍था द्वारा चलाया जा रहा है जिसमें थाला के प्रतिनिधियों के अलावा किसान भी हैं।

बिजली

राज्‍य में बिजली की कुल उत्‍पादन क्षमता 10,214 मेगावाट थी। राज्‍य क्षेत्र की स्‍थापित क्षमता 5,690 मेगावाट और निजी क्षेत्र की स्‍थापित क्षमा 1,180 मेगावाट है। इसके अलावा इसे केंद्र क्षेत्र से अपने हिस्‍से की 2,825 मेगावाट बिजली मिलती है, 305 मेगावाट बाहरी सहायता से तथा 214 मेगावाट अधिगृहीत विद्युत परियोजनाओं से प्राप्‍त होती है। इसके अलावा पवनचक्‍कियों से 4270 मेगावाट, सहयोगी उत्‍पादन परियोजनाओं से 466.10 मेगावाट तथा जैव परियोजनाओं से 109.55 मेगावाट बिजली प्राप्‍त होती है।

परिवहन

सडकें: तमिलनाडु में सड़कों के संजाल की कुल लंबाई करीब 61641 कि.मी. हैं, जिसमें भूतल सड़कें 60;901 कि.मी. हैं।

रेलवे: राज्‍य में चेन्‍नई, मदुरै, तिरुचिरापल्‍ली, सलेम, अरक्‍कोणम, कोयंबटूर और तिरुनेलवेली मुख्‍य जंक्‍शन हैं। रेलवे लाइनों की कुल लंबाई 3927 किलोमीटर है।

उड्डयन: चेन्‍नई हवाई अड्डा दक्षिणी क्षेत्र का अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा होने की वजह से वायुमार्ग का मुख्‍य केंद्र बन गया है। इसके अलावा तिरुचिरापल्‍ली, मदुरै, कोयंबटूर और सलेम में भी हवाई अड्डे हैं।

बंदरगाह:चेन्‍नई और तूतीकोरिन राज्‍य के प्रमुख बंदरगाह हैं तथा कुड्डालूर और नागापट्टनम सहित सात छोटे बंदरगाह हैं।

त्‍योहार

फसल कटाई के त्योहार पोंगल में जनवरी माह में किसान अपनी अच्छी फसल के लिए आभार प्रकट करने हेतु सूर्य, पृथ्‍वी और पशुओं की पूजा करते हैं। पोंगल के बाद दक्षिण तमिलनाडु के कुछ हिस्‍सों में 'जल्‍लीकट्टू' (तमिलनाडु शैली की सांडों की लड़ाई) होता है। तमिलनाडु में अलंगनल्‍लूर 'जल्‍लीकट्टू' के लिए विश्‍व-भर में प्रसिद्ध है। 'चित्तिरै' मदुरै का लोकप्रिय त्योहार है। यह पांड्य राजकुमारी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्‍वर के अलौकिक परिणय बंधन की स्‍मृति में मनाया जाता है। तमिल महीने 'आदि' के अठारहवें दिन नदियों के किनारे 'आदिपेरुकु' पर्व मनाया जाता है। इसके साथ ही नई फसल की बुवाई से संबंधित काम भी शुरू हो जाता है। नृत्‍य महोत्‍सव 'मामल्‍लपुरम' एक अद्भुत महोत्‍सव है। समुद्र तट से लगे प्राचीन नगर मामल्‍लपुरम में पल्‍लव राजाओं द्वारा 13 शताब्‍दी पूर्व चट्टानों से काटकर बनाए गए स्‍तंभों का एक खुला मंच है, जिस पर लोकनृत्‍यों के अलावा नृत्‍यकला के सर्वश्रेष्‍ठ और सुविख्‍यात कलाकारों द्वारा भतरनाट्यम, कुचीपुड़ी, कथकली, और ओडिसी नृत्‍य प्रस्तुत किए जाते हैं। 'नाट्यांजलि' नृत्‍य महोत्‍सव में मंदिरों की नगरी चिदंबरम के निवासी सृष्‍टि के आदि नर्तक भगवान नटराज को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 'महामाघम्' एक पवित्र पर्व है, जो बारह वर्ष में एक बार होता है। मंदिरों की नगरी कुंभकोनम् को यह नाम दैवी पात्र 'कुंभ' से मिला है। ग्रीष्‍म महोत्‍सव हर वर्ष 'पर्वतीय स्‍थलों की रानी' सदाबहार ऊटी, विशिष्‍ट स्‍थल कोडाईकनाल या येरूकाड की स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक ऊंची पहाड़ियों पर मनाया जाता है। कंथूरी उत्‍सव वास्‍तव में एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार है, जिसमें विभिन्‍न समुदायों के श्रद्धालु संत फकीर कादिरवाली की दरगाह पर इकट्ठे होते हैं। संत कादिरवाली के शिष्‍य-वंशजों में से किसी एक को 'पीर' अथवा आध्‍यात्‍मिक नेता चुना जाता है और उसकी अर्चना की जाती है। इस उत्‍सव के दसवें दिन फकीर की दरगाह पर चंदन घिसा जाता है और उस पवित्र चंदन को सब लोगों में बांट दिया जाता है। 'वेलंकन्‍नी' उत्‍सव के बारे में अनेक आश्‍चर्यनजक दंतकथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक यह है कि सोलहवीं शताब्‍दी में पुर्तगाली नाविकों ने कुंवारी मेरी के लिए एक विशाल गिरजाघर बनवाने का संकल्‍प लिया था, क्‍योंकि उन्‍हीं की कृपा से भयंकर समुद्री तूफान से उनके जीवन की रक्षा हुई थी। 'वेलंकन्‍नी' उत्‍सव देखने के लिए हजारों लोग नारंगी पट्टियां डालकर उस पवित्र स्‍थान पर एकत्र होते हैं, जहां जहाज आकर जमीन पर लगा था। कुंवारी मेरी द्वारा रोगियों को ठीक कर देने की चमत्‍कारी शक्‍तियों से संबंधित अनेक बातें भी इतनी ही प्रचलित हैं और इसके लिए यह गिरजाघर, पूर्व का लार्डस के नाम से भी प्रसिद्ध है।

'नवरात्रि' पर्व का शाब्‍दिक अर्थ 'नौ रात्रियां' है जो भारत के विभिन्‍न प्रदेशों में भिन्‍न-भिन्‍न रूपों में और अनोखे ढंग से मनाया जाता है। यह पर्व शक्‍ति, धन और ज्ञान के लिए देवी 'शक्‍ति' को संतुष्‍ट करने के लिए मनाया जाता है। तमिलनाडु का प्रकाश-पर्व 'कार्तिगै दीपम्' भी बहुत प्रसिद्ध है। इसमें घरों के बाहर मिट्टी के दीए जलाए जाते हैं और उल्‍लासपूर्वक पटाखे छोड़े जाते हैं। तमिलनाडु का संगीत महोत्‍सव चेन्‍नई में दिसंबर में मनाया जाता है। इसमें कर्नाटक संगीत की महान और अमूल्‍य पंरपरा का निर्वाह किया जाता है और इस समारोह में नये और पुराने कलाकारों द्वारा संगीत और नृत्‍य की अविस्‍मरणीय प्रस्‍तुतियां होती हैं।

पर्यटन स्‍थल

चेन्‍नई, मामल्‍लपुरम, पूंपुहार, कांचीपुरम, कुंभकोणम, धारासुरम, चिदंबरम, तिरुअन्‍नामलै, श्रीरंगम, मदुरै, रामेश्‍वरम, तिरुनेलवेल्‍ली, कन्‍याकुमारी, तंजावुर, वेलंकन्‍नी, नागूर चित्तान वसाल, कलुगुमलै (स्‍मारक केंद्र), कोर्टलम, होगेनक्‍कल, पापनाशम, सुरूली (जल-प्रपात), ऊटी (उदगमंडलम), कोडाईकनाल, यरकाड, इलागिरि कोल्‍लिहिल्‍स (पर्वतीय स्‍थल), गुइंडी (चेन्‍नई), मुदुमलाई, अन्‍नामलाई, मुंदांथुरै, कालाकाड (वन्य जीव अभ्‍यारण्‍य), वेदंथंगल तथा प्‍वाइंट केलिमियर (पक्षी अभ्‍यारण्‍य) और अरिनगर अन्‍ना चिड़ियाघर आदि पर्यटन की दृष्‍टि से कुछ महत्‍वपूर्ण स्‍थान हैं।