शनिवार, 14 नवंबर 2020

विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day)

 विश्व मधुमेह दिवस

(World Diabetes Day)

विश्व मधुमेह दिवस प्रत्येक वर्ष 14 नवंबर को मनाया जाता है। निरन्तर मधुमेह रोगियों की संख्या में हो रही वृद्धि को देखते हुए 1991 में अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने हेतु प्रति वर्ष विश्व मधुमेह दिवस आयोजित करने का विचार किया। इस हेतु उन्होंने 14 नवंबर का दिन चयनित किया। 14 नवंबर विश्व मधुमेह दिवस के रूप में वर्ष 1991 से मनाया जा रहा है। प्रति वर्ष विश्व मधुमे‍ह दिवस का अलग ध्येय होता है। इस वर्ष मधुमे‍ह दिवस का ध्येय है 'मधुमे‍ह के विषय में लोगों को शिक्षित करना' 'बच्चों एवं किशोरावस्था में मधुमेह'

खोज

मधुमेह रोग के कारण एवं इसके विभिन्न पहलुओं को समझने हेतु कई लोग प्रयासरत थे। इनमें से एक जोड़ी फ्रेडरिक बैटिंग एवं चार्ल्स बेस्ट की भी थी, जो पैनक्रियाज ग्रन्थि द्वारा स्त्रावित तत्त्व के रसायनिक संरचना की खोज में लगे हुए थे। इस तत्त्व को अलग कर उन्होंने अक्टूबर, 1921 में प्रदर्शित किया कि यह तत्त्व शरीर में ग्लूकोज़ का निस्तारण करने में अहम भूमिका निभाता है और इसकी कमी होने से मधुमेह रोग हो जाता है। इस तत्त्व को इंसुलिन का नाम दिया गया। इसकी खोज मधुमेह के इतिहास में एक मील का पत्थर है। इस कार्य हेतु इन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इतिहास

14 नवंबर को फ्रेडरिक बैटिंग का जन्म दिवस है। अतः विश्व मधुमेह दिवस हेतु इस तिथि का चयन किया गया। फ्रेडरिक बेटिंग के योगदान को याद रखने के लिए इंटरनेशनल डायबेटिक फेडरेशन द्वारा 14 नवंबर को दुनिया के 140 देशों में मधुमेह दिवस मनाया जाता है। प्रारम्भ में विश्व मधुमेह दिवसहेतु यिन और याँगको प्रतीक चिह्न के लिये चुना गया था।

चीनी संस्कृति में यिन और याँगको द्वैतवात के अनुसार प्रकृति में संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यह पहचान चिह्न इस बात की ओर इंगित करता है कि इस बीमारी पर समुचित लगाम कसने हेतु रोगी, चिकित्सक, सामाजिक जागरूकता आदि विभिन्न तत्वों के बीच संतुलन होना आवश्यक है।

अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ के सतत प्रयास के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने अन्ततः मधुमेह की चुनौती को स्वीकारा और दिसम्बर, 2006 में इसे अपने स्वास्थ कार्यक्रमों की सूची में शामिल किया। सन् 2007 से अब यह संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के सूची में शामिल होने का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि अब संयुक्त राष्ट संघ के सदस्य देश अपनी स्वास्थ्य संबंधी नीति-निर्धारण में इसे महत्त्व दे रहें हैं।

प्रतीक चिह्न

सन 2007 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिवस को अंगीकार करने के बाद इस का प्रतीक चिह्न नीला छल्ला चुना गया है। छल्ला या वृत्त, निरंतरता का प्रतीक है। वृत्त इस बात का प्रतीक है विश्व के सभी लोग इस पर काबू पाने के लिये एकजुट हों। नीला रंग आकाश, सहयोग और व्यापकता का प्रतीक है। इस प्रतीक चिह्न के साथ जो सूत्र वाक्य दिया गया है वह है- मधुमेह के लिए एकजुटता।

केन्द्रीय विचार

प्रत्येक वर्ष, 'विश्व-मधुमेह दिवस' किसी एक केन्द्रीय विचार पर बल देता है। वर्ष 2008 का विचार मधुमेह एवं बच्चे था। बच्चों में मधुमेह प्रकार-1 एवं प्रकार-2 दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

बच्चों में मधुमेह

बच्चों में मुख्यतः प्रकार-1 मधुमेह होता है, जिसके चिकित्सा के लिए जीवन पर्यन्त इंसुलिन लेना होता है। कई बार इससे पीड़ित बच्चें के लक्षणों को न पहचान पाने के कारण उनकी मौत, डायाबिटीक कोमा में हो जाती है। बीमारी के निदान होने के बाद भी आर्थिक और अन्य कारणों से इन बच्चों को समुचित चिकित्सा नहीं मिल पाती। बदलते जीवन शैली और ठोस, उच्च ऊर्जा युक्त भोजन की प्रचुरता के कारण बच्चों में मोटापे की प्रवृत्ति इधर बहुत तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी आंकड़े बताते हैं कि 7 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के बीच मोटापे की दर में 1985 से 1997 के बीच दो से चार गुनी वृद्धि हुई है। भारत में तमिलनाडु में डा. रामचन्द्रन द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण में 13 से 18 वर्ष के बच्चो में 18% में मोटापा पाया गया। बच्चों में बढ़ते मोटापे की प्रवृत्ति एवं शारीरिक श्रम में कमी के कारण अब प्रकर-2 मधुमेही बच्चे भी बड़ी संख्या में देखने को मिल रहें हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में लेते हुए वर्ष 2008 विश्व मधुमेह दिवस का केन्द्रीय विचार 'बच्चे और मधुमेह' दिया गया। वर्ष 2008 से 2009 में मधुमेह आत्म देखभाल संस्था ने बच्चों को केन्द्रित कर वर्ष भर के लिये एक अभियान शुरू किया था जिसका नाम मधुमेह विजय दिया गया। इस अभियान के तहत प्रति माह विभिन्न स्कूलों में बच्चों एवं अध्यापकों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने, स्वस्थ भोजन, जीवन शैली एवं व्यायाम की महत्ता समझाने के लिये व्याख्यान किये गये और विज्ञापन एवं नारा प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों के सृजनात्मक सोच को विकसित किया गया।

 

वर्ष

शीर्षक

2020

नर्स और डायबिटीज

2018 से 2019

द फैमिली एंड डायबिटीज - डायबिटीज की चिंता हर परिवार को है।

2017

महिलाओं और मधुमेह - स्वस्थ भविष्य के लिए हमारा अधिकार।

2016

डायबिटीज पर आंखें।

2015

स्वस्थ भोजन।

2014

नाश्ते के लिए जाओ ब्लू।

2013

हमारे भविष्य की रक्षा करें: मधुमेह शिक्षा और रोकथाम।

2009 से 2012

मधुमेह के विषय में लोगों को शिक्षित करना

2008

अब कुछ अलग कर दिखाने का समय है। बच्चों एवं किशोरों को मधुमेह से बचाइए।

2007

264 क़दम चलें।

2006

बच्चों को मधुमेह से बचाइए।

2005

मधुमेह में पैरों की देखभाल ज़रूरी है।

2004

मोटापा छुड़ाएँ, मधुमेह से बचें।

2003

मधुमेह रोगियों को गुर्दे की ख़राबी पर जागरुक करें।

2002

मधुमेह में करें आँखों की देखभाल।

2001

मधुमेह में करें ह्र्दय की देखभाल।

2000

सही जीवन शैली से रोकें मधुमेह को।

1999

मधुमेह के कारण राष्ट्रीय बजट पर ख़तरा है।

1998

मधुमेह मरीज़़ों के अधिकार सुरक्षित हैं।

1997

विश्वव्यापी जागरुकता ज़रुरी है।

1996

इंसुलीन ही जीवन का अमॄत है।

1995

बिना जानकारी मधुमेह के रोगी का भविष्य खतरे में होगा।

1994

बढ़ती उम्र मधुमेह का जोखिम कारक है इसे कम कर सकते हैं।

1993

किशोरावस्था में मधुमेह की देखभाल।

1992

मधुमेह विश्वव्यापी एवं सभी उम्र की समस्या है।

1991

मधुमेह पर जनता को जागरुक करें।

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