खुशवन्त सिंह
Khushwant
Singh
खुशवन्त
सिंह (जन्म: 2 फरवरी 1915, मृत्यु: 20 मार्च 2014)
भारत के एक प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक, उपन्यासकार
और इतिहासकार थे। एक पत्रकार के रूप में उन्हें बहुत लोकप्रियता मिली। उन्होंने
परमम् तरीके से नए तरीके की पत्रकारिता शुरू की। भारत सरकार के विदेश मन्त्रालय
में भी उन्होंने काम किया। 1980 से 1986 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे।
खुशवन्त
सिंह जितने भारत में लोकप्रिय थे उतने ही पाकिस्तान में भी लोकप्रिय थे। उनकी
पुस्तक ट्रेन टू पाकिस्तान बेहद लोकप्रिय हुई। इस पर फिल्म भी बन गई है। उन्हें
पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वह अपना सम्पूर्ण जीवन एक
जिन्दादिल इंसान की तरह पूरी कर्मठता के साथ जिया।
व्यक्तिगत
जीवन
खुशवन्त
सिंह का जन्म 2 फरवरी 1915 को हदाली, पंजाब
(अविभाजित भारत) में एक सिख परिवार में हुआ था। उन्होंने देशननम्ट कॉलेज, लाहौर और कैम्ब्रिज यूनी कॉलेज लन्दन में शिक्षा प्राप्त करने के बाद
लन्दन से ही क़ानून की डिग्री ली। पढ़ाई के क्षेत्र में आरम्भ से ही वे अपने
स्वच्छंद स्वभाव के कारण बहुत अच्छे नहीं थे और कॉलेज तक की परीक्षाओं में उन्हें
वरीयता: तीसरी श्रेणी ही प्राप्त हुई। कानून की डिग्री लेने के बाद उन्होंने लाहौर
में वकालत शुरू की। उनके पिता सर सोभा सिंह अपने समय के प्रसिद्ध ठेकेदार थे। उस
समय सोभा सिंह को मध्य दिल्ली का मालिक कहा जाता था।
खुशवन्त
सिंह का विवाह कँवल मलिक के साथ हुआ था। उनके पुत्र का नाम राहुल सिंह और पुत्री
का नाम ग्रंथ है। उनका निधन 99 साल की उम्र में 20 मार्च 2014 को नई दिल्ली में हुआ।
पेश
है
एक
पत्रकार के रूप में भी खुशवंत सिंह ने बहुत ख्याति अर्जित की। 1951 में वे
आकाशवाणी से जुड़े थे और 1951 से 1953 तक भारत सरकार के पत्र 'योजना' का संपादन किया। 1980 तक मुंबई से प्रकाशित
प्रसिद्ध साप्ताहिक 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया' और 'न्यू डेल्ही' के संपादन
में।
1983
तक दिल्ली के प्रमुख दैनिक 'हिन्दुस्तान
टाइम्स' के संपादन भी वही थे। केवल से वे प्रति सप्ताह एक
लोकप्रिय 'कॉलम' लिखते हैं, जो कई भाषाओं के दैनिक पत्रों में प्रकाशित होता है। खुशवन्त सिंह
उपन्यासकार, इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में विख्यात
रहे हैं।
वर्ष
1947 से कुछ वर्षों तक खुशवन्त सिंह ने भारत के विदेश मंत्रालय में महत्त्वपूर्ण
पदों पर कार्य किया। 1980 से 1986 तक वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे।
लेखन
कार्य और प्रकाशन
खुशवंत
सिंह मुख्य तो कथाकार हैं। उपन्यास और कहानियों के क्षेत्र में उनका योगदान उनके
लेखन में प्राथमिक महत्व का है। हालांकि, इसके
अतिरिक्त व्यंग्य-विनोद-मिश्रित विचारशील और इतिहास के क्षेत्र में भी उनका योगदान
महत्वपूर्ण है। संस्मरण और आत्मकथा लिख कर भी उन्होंने प्रसिद्धि प्राप्त की है।
वर्तमान संदर्भों और प्राकृतिक वातावरण पर भी उनकी कई रचनाएँ हैं। दो खंडों में
प्रकाशित 'सिक्कों का इतिहास' उनका
प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति है। हालांकि इस इतिहास में कुछ तथ्यों की प्रामाणिकता पर
संदेह भी व्यक्त किया गया है। साहित्य के क्षेत्र में पिछले सत्तर वर्ष में खुशवंत
सिंह का विविध आयाम योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है।
खुशवन्त
सिंह के उपन्यासों में प्रसिद्ध हैं - 'डेल्ही',
'ट्रेन टू पाकिस्तान', 'दि कंपनी ऑफ़ वूमन।'
इसके अलावा वे लगभग 100 महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखते हैं। अपने जीवन
में सेक्स, मजहब और ऐसे ही विषयों पर की गई टिप्पणियों के
कारण वे हमेशा आलोचना के केंद्र में बने रहे। उन्होंने इलेस्ट्रेटेड विकली जैसे
पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
प्रमुख
प्रकाशित पुस्तकें
(हिंदी
में अनूदित)
उपन्यास-
दिल्ली
(पुस्तक प्रकाशन, नई दिल्ली से)
पाकिस्तान
मेल (राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से)
महिलाए
(राजपाल एंड सन्स, नई दिल्ली से)
सनसेट
क्लब (राजपाल एंड सन्स, नई दिल्ली से)
टाइगर
टाइगर (राजपाल एंड सन्स, नई दिल्ली से)
बोलेगी
न बुलबुल अब (राजपाल एंड सन्स, नई दिल्ली से)
कहानी-
प्रस्तुत
कहानियाँ (राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से)
खुशवंत
सिंह की सम्पूर्ण कहानियों (राजपाल एंड सन्स, नई
दिल्ली से)
आत्मकथा
/ संस्मरण-
सच,
प्रेम और थोड़ी सी शरारत (-बी निर्मला जैन) [राजकमल प्रकाशन,
नई दिल्ली से]
मेरे
मित्र: कुछ महिलाएँ, कुछ पुरुष
(पुस्तकघर प्रकाशन, नई दिल्ली से)
मेरी
दुनिया मेरे दोस्त (राजपाल और सन्स, नई
दिल्ली से)
इतिहास-
सिखों
का इतिहास (दो खंडों में, उषा महाजन)
[पुस्तकघर प्रकाशन, नई दिल्ली से]]
अन्य-
मेरा
लहुलुहान पंजाब (राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से)
सम्मान
भारत
सरकार द्वारा साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें
1974 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
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