त्रिपुरा
Tripura
त्रिपुरा
उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित भारत का एक राज्य है। यह भारत का तीसरा सबसे छोटा
राज्य है जिसका क्षेत्रफल 10491 वर्ग किमी है। इसके उत्तर,
पश्चिम और दक्षिण में बांग्लादेश स्थित है जबकि पूर्व में असम और
मिजोरम स्थित हैं। अगरतला त्रिपुरा की राजधानी है। बंगाली और त्रिपुरी भाषा (कोक
बोरोक) यहाँ की मुख्य भाषायें हैं।
त्रिपुरा
पूर्वोत्तर में स्थित भारतीय राज्य है, जिसकी
सीमाएं मिजोरम, असम तथा बांग्लादेश से लगी हुई हैं। उत्तर,
दक्षिण तथा पश्चिम में यह बांग्लादेश से घिरा है तथा इसके कुल सीमा
क्षेत्र का 84 फीसदी यानी 856 किलोमीटर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में है।
असम के साथ इसकी सीमा की लंबाई 53 किलोमीटर है तथा मिजोरम के साथ यह 109 किलोमीटर
लंबी है। यह राज्य राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के माध्यम से पूरे देश से जुड़ा हआ है।
यह राजमार्ग असम के करीमगंज जिले की पहाडियों के बीच में से होता हुआ गुजरात है
तथा मेघालय, असम, उत्तर बंगाल से होते
हुए कोलकाता तक जाता है।
परिवहन
सडकें
त्रिपुरा
में विभिन्न प्रकार की सड़कों की कुल लंबाई 15,227 कि॰मी॰ है,
जिसमें से मुख्य जिला सड़कें 454 कि.मी., अन्य
जिला सड़कें 1,538 कि॰मी॰ हैं।
रेलवे
राज्य
में रेल मार्गो की कुल लंबाई 66 कि॰मी॰ है। रेलवे लाइन मानूघाट तक बढा दी गई है
तथा अगरतला तक रेलमार्ग पहुंचाने का काम पूरा किया जा च्हुका है। मानू अगरतला रेल
लाइन (88 कि.मी.) को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया गया था।
आधुनिक
त्रिपुरा क्षेत्र पर कई शताब्दियों तक त्रिपुरी राजवंश ने राज किया।
त्रिपुरा
की स्थापना 14वीं शताब्दी में माणिक्य नामक
इंडो-मंगोलियन आदिवासी मुखिया ने की थी, जिसने हिंदू धर्म
अपनाया था। 1808 में इसे ब्रिटिश साम्राज्य ने जीता, यह स्व-शासित शाही राज्य बना।1956 में यह भारतीय
गणराज्य में शामिल हुआ और 21 जनवरी 1972 में इसे राज्य का
दर्जा मिला। त्रिपुरा का आधे से अधिक भाग जंगलों से घिरा है, जो प्रकृति-प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करता है, किंतु
दुर्भाग्यवश यहां कई आतंकवादी संगठन पनप चुके हैं जो अलग राज्य की मांग के लिए
समय-समय पर राज्य प्रशासन से लड़ते रहते हैं। हैंडलूम बुनाई यहां का मुख्य उद्योग
है।
नाम
ऐसा
कहा जाता है कि राजा त्रिपुर, जो ययाति वंश
का 39 वाँ राजा था के नाम पर इस राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा। एक मत के मुताबिक
स्थानीय देवी त्रिपुर सुन्दरी के नाम पर यहाँ का नाम त्रिपुरा पड़ा। यह हिन्दू धर्म
के 51 शक्ति पीठों में से एक है।इतिहासकार कैलाश चन्द्र सिंह के मुताबिक यह शब्द
स्थानीय कोकबोरोक भाषा के दो शब्दों का मिश्रण है - त्वि और प्रा। त्वि का अर्थ
होता है पानी और प्रा का अर्थ निकट। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में यह
समुद्र (बंगाल की खाड़ी) के इतने निकट तक फैला था कि इसे इस नाम से बुलाया जाने
लगा।
उल्लेख
त्रिपुरा
का उल्लेख महाभारत, पुराणों तथा अशोक
के शिलालेखों में मिलता है। आज़ादी के बाद भारतीय गणराज्य में विलय के पूर्व यह एक
राजशाही थी। उदयपुर इसकी राजधानी थी जिसे अठारहवीं सदी में पुराने अगरतला में लाया
गया और उन्नीसवीं सदी में नये अगरतला में। राजा वीर चन्द्र माणिक्य महादुर
देववर्मा ने अपने राज्य का शासन ब्रिटिश भारत की तर्ज पर चलाया। गणमुक्ति परिषद
द्वारा चलाए गए आन्दोलनों से यह सन् 1949 में भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ।
सन्
1971 में बांग्लादेश के निर्माण के बाद यहाँ सशस्त्र संघर्ष आरंभ हो गया। त्रिपुरा
नेशनल वॉलेंटियर्स, नेशनल लिबरेशन
फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा जैसे संगठनों ने स्थानीय बंगाली लोगों को निकालने के लिए मुहिम
छेड़ रखी है।
इतिहास
त्रिपुरा
का बड़ा पुराना और लंबा इतिहास है। इसकी अपनी अनोखी जनजातीय संस्कृति तथा दिलचस्प
लोकगाथाएं है। इसके इतिहास को त्रिपुरा नरेश के बारे में ‘राजमाला’ गाथाओं तथा मुसलमान इतिहासकारों के वर्णनों
से जाना जा सकता है। महाभारत और पुराणों में भी त्रिपुरा का उल्लेख मिलता है।
राजमाला के अनुसार त्रिपुरा के शासकों को ‘फा’ उपनाम से पुकारा जाता था जिसका अर्थ ‘पिता’ होता है।
14वीं
शताब्दी में बंगाल के शासकों द्वारा त्रिपुरा नरेश की मदद किए जाने का भी उल्लेख
मिलता है। त्रिपुरा के शासकों को मुगलों के बार-बार आक्रमण का भी सामना करना पड़ा
जिसमें आक्रमणकारियों को कमोबेश सफलता मिलती रहती थी। कई लड़ाइयों में त्रिपुरा के
शासकों ने बंगाल के सुल्तानों कों हराया।
19वीं
शताब्दी में महाराजा वीरचंद्र किशोर माणिक्य बहादुर के शासनकाल में त्रिपुरा में
नए युग का सूत्रपात हुआ। उन्होने अपने प्रशासनिक ढांचे को ब्रिटिश भारत के नमूने
पर बनाया और कई सुधार लागू किए। उनके उत्तराधिकारों ने 15 अक्तूबर,
1949 तक त्रिपुरा पर शासन किया। इसके बाद त्रिपुरा भारत संघ में
शामिल हो गया। शुरू में यह भाग-सी के अंतर्गत आने वाला राज्य था और 1956 में राज्यों
के पुनर्गठन के बाद यह केंद्रशासित प्रदेश बना। 1972 में इसने पूर्ण राज्य का
दर्जा प्राप्त किया। त्रिपुरा बांग्लादेश तथा म्यांमार की नदी घाटियों के बीच
स्थित है। इसके तीन तरफ बांग्लादेश है और केवल उत्तर-पूर्व में यह असम और मिजोरम
से जुड़ा हुआ है।
भारत
में विलय
मुख्य
भाषा
बंगाली
और त्रिपुरी भाषा (कोक बोरोक) यहां मुख्य रूप से बोली जाती हैं। ऐसा माना जाता है
कि राजा त्रिपुर, जो ययाति वंश का 39
वें राजा थे, उनके नाम पर ही इस राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा।
इसके साथ ही एक मत के अनुसार स्थानीय देवी त्रिपुर सुन्दरी के नाम पर इसका नाम
त्रिपुरा पड़ा। यह हिन्दू धर्म की 51 शक्ति पीठों में से एक है। इस राज्य के
इतिहास को 'राजमाला' गाथाओं और मुसलमान
इतिहासकारों के वर्णनों से जाना जा सकता है।
महाभारत
और पुराणों में भी मिलता है उल्लेख
महाभारत
और पुराणों में भी त्रिपुरा का उल्लेख मिलता है। आज़ादी के बाद भारतीय गणराज्य
में विलय के पूर्व यह एक राजशाही थी। उदयपुर इसकी राजधानी थी जिसे 18 वीं सदी में
पुराने अगरतला में लाया गया और 19 वीं सदी में नये अगरतला में। राजा वीर चन्द्र
माणिक्य महादुर देववर्मा ने अपने राज्य का शासन ब्रिटिश भारत की तर्ज पर चलाया।
पूर्वी
पाक में विलय चाहता था त्रिपुरा
गणमुक्ति
परिषद द्वारा चलाए गए आन्दोलनों से यह सन् 1949 में भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ।
लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक भी त्रिपुरा शाही परिवार का एक धड़ा राज्य का विलय
पूर्वी पाकिस्तान के साथ चाहता था। लेकिन त्रिपुरा के आखिरी राजा बीर बिक्रम किशोर
माणिक्य (1923-1947) ने अपने मौत के पहले भारत में विलय की इच्छा जाहिर की थी।
जिसके बाद भारत सरकार ने त्रिपुरा को अपने कब्जे में ले लिया।
संघर्ष
का आरंभ
लेकिन
सन् 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के बाद यहां सशस्त्र संघर्ष आरंभ हो गया।
त्रिपुरा नेशनल वॉलेंटियर्स, नेशनल लिबरेशन
फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा जैसे संगठनों ने स्थानीय बंगाली लोगों को निकालने के लिए मुहिम
छेड़ रखी है। 14वीं शताब्दी में बंगाल के शासकों द्वारा त्रिपुरा नरेश की मदद किए
जाने का भी उल्लेख मिलता है। त्रिपुरा के शासकों को मुगलों के बार-बार आक्रमण का
भी सामना करना पडा जिसमें आक्रमणकारियों को कमोबेश सफलता मिलती रहती थी। कई
लड़ाइयों में त्रिपुरा के शासकों ने बंगाल के सुल्तानों कों हराया।
त्रिपुरा
में नए युग की शुरूवात
19वीं
शताब्दी में महाराजा वीरचंद्र किशोर माणिक्य बहादुर के शासनकाल में त्रिपुरा में
नए युग की शुरूवात हुई। उन्होने अपने प्रशासनिक ढांचे को ब्रिटिश भारत के नमूने
पर बनाया और कई सुधार लागू किए। उनके उत्तराधिकारों ने 15 अक्तूबर,
1949 तक त्रिपुरा पर शासन किया। इसके बाद त्रिपुरा भारत संघ में
शामिल हो गया। शुरू में यह भाग-सी के अंतर्गत आने वाला राज्य था और 1956 में राज्यों
के पुनर्गठन के बाद यह केंद्रशासित प्रदेश बना और इसके बाद 1972 में इसे पूर्ण
राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। आपको बता दें त्रिपुरा बांग्लादेश तथा म्यांमार
की नदी घाटियों के बीच स्थित है। इसके तीन तरफ बांग्लादेश है और उत्तर-पूर्व में
यह असम और मिजोरम से जुड़ा हुआ है।
संस्कृति
दुर्गा
पूजा त्रिपुरा का प्रमुख त्यौहार है।
त्रिपुरा
में हिन्दुओं की संख्या लगभग 84 प्रतिशत है। दुर्गापूजा यहा का प्रमुख त्यौहार है।
बांग्ला यहाँ की प्रमुख भाषा है।
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